डायबिटीज पेशेंट क्या खाएं और क्या नहीं? सही दालें कौन-सी, गेहूं की रोटी क्यों नुकसानदायक?
आज के समय में डायबिटीज एक ऐसी बीमारी बन चुकी है, जो केवल दवाओं से नहीं बल्कि सही खानपान और जीवनशैली से नियंत्रित होती है। बहुत से लोगों के मन में रोज़मर्रा के खाने को लेकर भ्रम रहता है—क्या रोटी खा सकते हैं, दाल-चावल ठीक है या नहीं, चाय पीनी चाहिए या नहीं। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि डायबिटीज पेशेंट क्या खाएं, क्या न खाएं और किन बातों का ध्यान रखें। यह जानकारी आम लोगों के लिए जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है, जैसा कि मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव अपने मरीजों को सरल भाषा में समझाते हैं।

डायबिटीज पेशेंट को गेहूं की रोटी क्यों नहीं खाना चाहिए?
अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या गेहूं की रोटी डायबिटीज में नुकसानदायक है। दरअसल, रिफाइंड आटे या ज्यादा पिसे हुए गेहूं की रोटी जल्दी शुगर बढ़ा सकती है। इसमें फाइबर कम होता है, जिससे ग्लूकोज तेजी से ब्लड में पहुंचता है।
इसका मतलब यह नहीं कि रोटी बिल्कुल छोड़ दें, बल्कि मात्रा और प्रकार महत्वपूर्ण है। मोटा आटा, मल्टीग्रेन या ज्वार-बाजरे की रोटी सीमित मात्रा में बेहतर विकल्प हो सकती है। जब बात आती है कि डायबिटीज पेशेंट क्या खाएं, तो रोटी हमेशा सब्ज़ी और प्रोटीन के साथ लें।

क्या दाल-चावल खाना डायबिटीज पेशेंट के लिए ठीक है?
दाल-चावल भारतीय भोजन का अहम हिस्सा हैं। दालें प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती हैं, जो ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करती हैं। समस्या तब होती है जब सफेद चावल ज्यादा मात्रा में खाए जाते हैं।
डायबिटीज में ब्राउन राइस, लाल चावल या कम मात्रा में उबले चावल बेहतर होते हैं। इसलिए अगर कोई पूछे कि डायबिटीज पेशेंट क्या खाएं, तो जवाब होगा—दाल ज़रूर खाएं, चावल सीमित रखें।

डायबिटीज पेशेंट को चाय का सेवन क्यों नहीं करना चाहिए?
बहुत से लोग दिन की शुरुआत चाय से करते हैं, लेकिन डायबिटीज में यह आदत नुकसानदायक हो सकती है। चाय में मिलाई जाने वाली चीनी और दूध ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।
खाली पेट चाय पीने से इंसुलिन का संतुलन भी बिगड़ सकता है। अगर चाय छोड़ना मुश्किल हो, तो बिना चीनी की ग्रीन टी या हर्बल चाय बेहतर विकल्प है। याद रखें, डायबिटीज पेशेंट क्या खाएं जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह जानना है कि क्या न पिएं।

डायबिटीज है, व्यक्ति को कैसे पता चलता है?
कई बार डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे आते हैं। बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना, अचानक वजन घटना, थकान और धुंधला दिखना इसके सामान्य संकेत हैं।
कुछ लोगों को तब पता चलता है जब किसी और जांच के दौरान शुगर बढ़ी हुई मिलती है। इसलिए समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच बहुत जरूरी है, खासकर अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास हो। सही समय पर पहचान होने से यह समझना आसान हो जाता है कि डायबिटीज पेशेंट क्या खाएं और कैसे जीवनशैली बदलें।

क्या मधुमेह से आंखों को नुकसान पहुंचता है?
हाँ, लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसे डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है, जिसमें आंखों की नसें कमजोर हो जाती हैं।
शुरुआत में लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन धीरे-धीरे देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए ब्लड शुगर कंट्रोल के साथ-साथ साल में एक बार आंखों की जांच बेहद जरूरी है। सही खानपान भी आंखों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।
डायबिटीज पेशेंट को कौन सी दालें खाना चाहिए?
डायबिटीज में सभी दालें लगभग सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन कुछ खास दालें ज्यादा फायदेमंद होती हैं।
मूंग दाल, मसूर दाल, चना दाल और अरहर दाल में फाइबर और प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है। ये धीरे-धीरे शुगर रिलीज करती हैं, जिससे ब्लड शुगर स्थिर रहता है। जब सवाल हो कि डायबिटीज पेशेंट क्या खाएं, तो दालों को रोज़ के भोजन में जरूर शामिल करें।

सही खानपान ही सही इलाज
अंत में यही कहा जा सकता है कि डायबिटीज का प्रबंधन केवल दवा से नहीं, बल्कि समझदारी भरे भोजन से होता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर जांच—ये तीनों मिलकर बीमारी को काबू में रखते हैं।
जैसा कि विशेषज्ञ बताते हैं, हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। सही जानकारी के साथ अगर आप यह समझ लें कि डायबिटीज पेशेंट क्या खाएं, तो एक स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीना पूरी तरह संभव है।