आज के समय में बच्चों में डायबिटीज एक गंभीर और तेजी से बढ़ती हुई समस्या बनती जा रही है। पहले यह बीमारी केवल बड़ों में अधिक देखी जाती थी, लेकिन अब बदलती जीवनशैली, जंक फूड और कम शारीरिक गतिविधि के कारण छोटे बच्चों में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। समय पर सही जानकारी और संतुलित आहार से इस स्थिति को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव के अनुसार, अगर सही खानपान और नियमित निगरानी रखी जाए तो बच्चों में डायबिटीज के बावजूद बच्चा एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

बच्चों में डायबिटीज क्या है?
बच्चों में डायबिटीज मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है –
- टाइप 1 डायबिटीज – इसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है।
- टाइप 2 डायबिटीज – इसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता।
भारत में टाइप 1 अधिक सामान्य है, लेकिन मोटापे के कारण टाइप 2 के मामले भी बढ़ रहे हैं।
बच्चों को क्या खिलाएं? (Healthy Foods)
1. साबुत अनाज
रोटी (मल्टीग्रेन/आटा), दलिया, ओट्स और ब्राउन राइस जैसे विकल्प बेहतर होते हैं। ये धीरे-धीरे शुगर रिलीज करते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ती।
2. हरी सब्जियाँ
पालक, लौकी, तोरी, भिंडी, गाजर और टमाटर जैसी सब्जियाँ फाइबर से भरपूर होती हैं। ये पाचन को बेहतर बनाती हैं और शुगर कंट्रोल में मदद करती हैं।

3. प्रोटीन युक्त आहार
दाल, पनीर, अंडा, सोया, राजमा और चना बच्चों के लिए अच्छे प्रोटीन स्रोत हैं। प्रोटीन से पेट देर तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती।
4. ताजे फल (सीमित मात्रा में)
सेब, अमरूद, पपीता, नाशपाती और संतरा जैसे फल नियंत्रित मात्रा में दिए जा सकते हैं। फलों का जूस देने की बजाय पूरा फल देना बेहतर है।
5. पर्याप्त पानी
मीठे पेय पदार्थों की जगह सादा पानी या नारियल पानी देना चाहिए।
डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव बताते हैं कि संतुलित आहार से बच्चों में डायबिटीज को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है।

बच्चों को क्या नहीं खिलाना चाहिए? (Avoid These Foods)
1. जंक फूड
पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और पैकेज्ड स्नैक्स में अधिक नमक और अस्वास्थ्यकर वसा होती है।
2. मीठे पेय
कोल्ड ड्रिंक, पैकेट जूस और एनर्जी ड्रिंक ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।
3. ज्यादा मिठाई
चॉकलेट, कैंडी, केक और पेस्ट्री का सेवन सीमित या बंद करना चाहिए।
4. सफेद ब्रेड और मैदा
मैदा से बने खाद्य पदार्थ शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं।
गलत खानपान से बच्चों में डायबिटीज की जटिलताएं बढ़ सकती हैं, इसलिए माता-पिता को सजग रहना जरूरी है।

जीवनशैली में जरूरी बदलाव
- रोज कम से कम 45–60 मिनट शारीरिक गतिविधि
- मोबाइल और टीवी का समय कम करें
- नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग
- समय पर इंसुलिन या दवा लेना
- पर्याप्त नींद (8–9 घंटे)
इन आदतों को अपनाकर बच्चों में डायबिटीज के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
माता-पिता के लिए विशेष सलाह
- बच्चे को बीमारी के बारे में सकारात्मक तरीके से समझाएं।
- स्कूल को बच्चे की स्थिति की जानकारी दें।
- बच्चे के टिफिन में हेल्दी विकल्प रखें।
- नियमित रूप से विशेषज्ञ से परामर्श लें।
डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव के अनुसार, सही मार्गदर्शन और नियमित देखभाल से बच्चों में डायबिटीज कोई बाधा नहीं बनती, बल्कि यह केवल एक नियंत्रित की जाने वाली स्थिति है।
Google पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. बच्चों में डायबिटीज के लक्षण क्या हैं?
बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, अचानक वजन कम होना, थकान और धुंधला दिखना इसके सामान्य लक्षण हैं।
2. क्या बच्चों में डायबिटीज पूरी तरह ठीक हो सकती है?
टाइप 1 डायबिटीज पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन सही इलाज और आहार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
3. क्या डायबिटीज से पीड़ित बच्चा खेल सकता है?
हाँ, नियमित व्यायाम और खेलना फायदेमंद है, लेकिन शुगर लेवल की निगरानी जरूरी है।
4. बच्चों के लिए सबसे अच्छा नाश्ता क्या है?
दलिया, अंडा, मूंग दाल चीला, ओट्स या मल्टीग्रेन रोटी के साथ सब्जी अच्छा विकल्प है।
5. क्या मीठा बिल्कुल बंद करना जरूरी है?
पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं, लेकिन मात्रा और समय का ध्यान रखना चाहिए।
निष्कर्ष
आज जरूरत है जागरूकता की। सही खानपान, नियमित जांच और विशेषज्ञ की सलाह से बच्चों में डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है। माता-पिता अगर शुरुआत से ही संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान दें, तो बच्चा स्वस्थ, आत्मविश्वासी और खुशहाल जीवन जी सकता है।
यदि आपके बच्चे में शुगर से जुड़े लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत किसी अनुभवी मधुमेह विशेषज्ञ से परामर्श लें। समय पर लिया गया सही कदम आपके बच्चे का भविष्य सुरक्षित कर सकता है।